चमोली जिले के गौचर को मिला स्वच्छ शहरों का खिताब

Publish 06-03-2019 19:38:08


चमोली जिले के गौचर को मिला स्वच्छ शहरों का खिताब

जगदीश पोखरियाल
गोपेश्वर/चमोली ।
चमोली जिले की नगर पालिका गौचर को स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए स्वच्छ शहरों के खिताब से नवाजा गया है। गौचर बदरीनाथ हाईवे पर अलकनंदा नदी के किनारे कर्णप्रयाग तहसील के अंतर्गत पडने वाला एक छोटा सा नगर है। जो सात पहाडियों से घिरा हुआ है। यह नगर गढवाल के प्रसिद्ध गौचर मेले से भी पहचाना जाता है।
गौचर को सबसे पहले पहचान तब मिली जब 1920 में तत्कालीन वायसराय की पत्नी लेडी विलिंगडन हवाई मार्ग से आई थी। उसके बाद 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ उनकी बहन विजया लक्ष्मी पंडित बदरीनाथ की यात्रा के लिए हवाई मार्ग से यहां पहुंचे थे।

क्या है गौचर
गौचर कर्णप्रयाग तहसील के अंतर्गत अलकनंदा के किनारे बसा और सात पहाडियों से घिरा हुआ एक छोटा सा शहर है। गौचर यह समुद्र तल से 800 मीटर (2,620 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी पहचान ऐतिहासिक व्यापार मेले अर्थात गौचर मेले से भी है। बेहद ही खूबसूरत गौचर पहाड़ी क्षेत्र में सबसे बड़े समतल स्थान पर है। इसके साथ ही यहां हर्वाइ पट्टी भी है। जो चीन सीमा से जुडे चमोली जिले के सेना के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।  

क्या है गौचर मेला
चमोली जनपद में नीति माणा घाटी के जनजातिय क्षेत्र के प्रमुख व्यापारी एवं जागृत जनप्रतिनिधि स्व. बालासिंह पॉल, पानसिंह बम्पाल एवं गोविन्द सिंह राणा ने चमोली जनपद में भी इसी प्रकार के व्यापारिक मेले के आयोजन का विचार प्रतिष्ठित पत्रकार एवं समाजसेवी स्व.गोविन्द प्रसाद नौटियाल के सम्मुख रखा। गढवाल के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के सुझाव पर माह नवम्बर 1943 में प्रथम बार गौचर में व्यापारिक मेले का आयोजन शुरू हुआ बाद में धीरे-धीरे औद्योगिक विकास मेले एवं सांस्कृतिक मेले का स्वरूप धारण कर लिया। गौचर उत्तराखंड में सबसे बड़े व्यापार मेलों में से जाना जाता है। गढ़वाल हिमालय के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले चमोली जिले के भोटिया, ऊन के प्रसंस्करण और रंग के अलावा, ऊनी वस्त्रों के लिए जाने जाते हैं। 1962 से पहले, भारत और पूर्व तिब्बत के बीच अंतर-सीमा व्यापार था, और भोटियाओं का स्वदेशी कुटीर उद्योग के लिए ऊन का आयात, आय का प्रमुख स्रोत था। लेकिन 1962 के बाद, चीन और भारत के बीच संघर्ष के कारण व्यापार बंद कर दिया गया। आजादी के बाद गौचर में मेले का आयोजन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिन के अवसर पर 14 नवम्बर से एक सप्ताह की अवधि तक किये जाने का निर्णय लिया गया। जो तब से हर वर्ष आयोजित किया जाता है। लेकिन बीच में कई बार कुछ अपरिहार्य कारणों से मेला स्थगित भी किया गया।


क्या कहती है नगर पालिका अध्यक्ष
नगर पालिका गौचर को स्वच्छता पुरस्कार मिलने पर पालिका अध्यक्ष अंजू बिष्ट बताती है कि चार जनवरी से 31 जनवरी 2019 में दिल्ली से आई एक टीम ने गोपनीय तरीके से जनता के बीच जाकर विभिन्न चरणों में चार बार सर्वे किया। अंतिम सर्वे ड्रोन कैमरे से किया गया। जब ड्रोन कैमरे से सर्वे हो रही थी जब उन्हें इसकी जानकारी मिली। बताया कि यह गोपनीय सर्वे 28 दिनों तक चला। जिसमें सर्वे टीम ने स्वच्छता, शौचालय, कूडा निस्तारण, गंगा की किनारे की सफाई आदि अनेक प्रकार का सर्वे जनता के बीच जाकर किया गया।  नगर पालिका अध्यक्ष इस पुरस्कार के मिलने का श्रेय गौचर की जनता के साथ ही नगर पालिका के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को देती है। और कहती है कि उन्हीं के सहयोग से यह सब संभव हो पाया है।

 

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