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Publish 02-02-2019 17:54:37


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मोदी व त्रिवेंद्र सरकार ने चार सालों में बैठा दिया देश का भट्टा: त्रिलोचन जोशी


अल्मोड़ा (शिबेन्द्र गोस्वामी )|केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के चार साल एंव प्रदेश की त्रिवेंद्र रावत सरकार के सवा साल पूर्ण होने पर प्रदेश कांग्रेस सचिव त्रिलोचन जोशी ने बयान जारी कर दोनों ही सरकारों को घोर जनविरोधी सरकार बताया। अपने बयान में केन्द्र की मोदी सरकार को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में देश के प्रधानमंत्री ने जो वायदे जनता से किये थे। वह सब जुमले साबित हो गये हैं। देश के करोड़ों शिक्षित-प्रशिक्षित बेरोजगार रोजगार के लिए सड़कों पर उतरे हैं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस सहित दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम रोज बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार के संरक्षण में कालाबाजारी उधोग फल-फूल रहा हैं। वहीं देश के प्रधानमंत्री ने अदूरदर्शिता का परिचय देते हुए नोटबंदी, जीएसटी जैसे आत्मघाती फैसले जनता के ऊपर लागूकर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। नोटबंदी के दुष्परिणाम का व्यापक असर अब जनता के सामने आ रहा हैं। देश के बैंको एवं एटीएम से नगदी गायब है। जनता को अपनी जमा पूंजी बैंको से निकालने को दर दर भटकना पड़ रहा है। पूरे देश में आर्थिक अराजकता का माहौल बन चुका है। देश का व्यापार एंव व्यापारी जीएसटी की मार से बुरी तरह से प्रभावित हैं। वहीं, विगत लोकसभा चुनाव में देश के प्रधानमंत्री ने अपने चुनावी भाषणों में देश की जनता से चीख-चीखकर कहा था कि वह देश हित में एक सजग चौकीदार बनकर रहेंगे। एक शहीद सैनिक के बदले वह दस आंतकी के सिर लाने का वायदा कर जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर गये। जब से मोदी सरकार सत्तारूढ़ हुई हैं। तब से चार वर्ष में सर्वाधिक 600 से ज्यादा सैनिक एवं अधिकारी देश की रक्षा के लिए पाकिस्तान की सीमा के पास शहीद हो चुके हैं। देश के प्रधानमंत्री कुछ भी करने में असमर्थ हैं। केंद्र की मोदी सरकार के विकास की सार्थकता का जीता जागता उदाहरण सांसदों द्वारा गोद लिये गांव बयां कर रहे हैं। गोद लिये गाँवों में बुनियादी सुविधाओं को सांसदों द्वारा मुहैया नहीं कराना सरकार की सबसे बड़ी नाकामयाबी को प्रदर्शित करता है। देश की आम जनता, किसान, बेरोजगार, युवा, महिलायें और कर्मचारी आदि मोदी सरकार की जनविरोधी निर्णयों से परेशान एवं आहत हैं। वहीं, प्रदेश की डबल इंजन सरकार का तमगा हासिल त्रिवेन्द्र रावत सरकार अपने सवा साल के कार्यकाल में जनता की नजरों से ओझल हो चुकी है। त्रिवेन्द्र सरकार के वायदे भी अपने पथ प्रदर्शक की तरह जुमले साबित हो चुके हैं। सबका साथ सबका विकास के नारे से सत्तासीन भाजपा सरकार अपने चहेतों का ही विकास कर रही है। जीरो टोलेरेन्स की सरकार द्वारा बहुचर्चित एनएच 74 सड़क घोटाले की सीबीआई जांच नहीं कराना, 100 दिन में लोकपाल का गठन न करना, प्रदेश में पहली बार सरकार की नीतियों से तंग आकर आठ किसानों की आत्महत्या करना आदि किसी भी सरकार की पोल खोलने के लिए काफी है। प्रदेश की आम जनता, बेरोजगार, युवा, किसान, सरकारी कर्मचारी घोर परेशान हैं। प्रदेश में लगातार बलात्कार, हत्या, डकैती, चोरी, फिरोती आदि की घटनायें चरम पर हैं। खनन माफियाओं का बोलबाला सिर चढ़कर बोल रहा है। कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। त्रिवेन्द्र सरकार के विधायक ही अपनी सरकार के खिलाफ उंगली उठाकर आवाज उठा रहे हैं। केन्द्र की मोदी सरकार के साथ ही त्रिवेन्द्र सरकार भी जनता का विश्वास खो चुकी है। प्रदेश की त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा निकायों के चुनाव सही समय पर नहीं कराना सरकार की मंशा को जाहिर करता है कि सरकार संवैधानिक संस्थानों को खत्म करने की साजिश कर रही है। त्रिवेन्द्र सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने प्रचण्ड बहुमत के विधायकों के आक्रोश को थामने के लिए प्रदेश के विधायकों के वेतन भत्तों में 120 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है। प्रदेश की वृद्ध, विधवा अपनी पेंशन के लिए बाट जोह रहे हैं। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार की जनोपयोगी, लोकप्रिय विकास योजनाओं को ठप्प करके सरकार ने विकास विरोधी रवैया प्रदर्शित किया हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में देश एंव प्रदेश की जनता जुमलेबाज, लोक लुभावने नारे देने वाली भाजपा को अपने मत के माध्यम से मुंहतोड़ जवाब के लिए तैयार बैठी है।

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