आपदा के बाद से नही बना पुल, 06 साल से जान जोखिम में डालकर आवाजाही को मजबूर

Publish 07-07-2019 11:48:10


आपदा के बाद से नही बना पुल, 06 साल से जान जोखिम में डालकर आवाजाही को मजबूर

थराली /चमोली (रमेश थपलियाल):  चमोली जिले के थराली विकास खंड के ढाढरबगड गदेरे पर बना पुल 2013 की आपदा में बह गया था, लेकिन आपदा के छह साल बाद भी अभी तक नो गांवों को जोड़ने वाला पुल नहीं बन पाया है। जिससे ग्रामीण समेत स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने का मजबूर है।
जून 2013 में प्राणमति नदी में बाढ़ आने से रणकोट, घुघुटी, गेराड़ी, चैनी, लेटाल, कलचुना, पार्था और कुराड सहित अन्य गांवों को जोड़ने वाला पुल बह गया था। जिससे यहां के लोगों का संपर्क कई दिनों तक देश-दुनिया से कट रहा और स्कूली बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाये। उसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने अस्थाई पुल निर्माण किया, लेकिन हर बाद  गदेरे के उफान आने से यह पुल बह जाता है। इसी तरह हर साल यहां के ग्रामीण इस स्थान पर लकड़ी का अस्थाई पुल बनाते हैं ताकि आवाजाही हो सके। कई बार तो ग्रामीण एवं बच्चे रशियों एवं तारों की सहायता से गधेरा पार करते हैं। जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। पिछले छह साल से ग्रामीण यहां पर स्थाई लोहे का पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं, अभी तक पुल का निर्माण नहीं किया जा सका है। ग्रामीण भवान सिंह, खिलाफ सिंह, सुजान सिंह, दिलमणि, खीम सिंह, दयाल सिंह, चंद्र सिंह आदि का कहना है कि उन्होंने इस पुल के निर्माण को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग, जिला पंचाय के अध्यक्ष, उपजिलाधिकारी एवं जिलाधिकारी तक अपनी फरियाद की गई है, लेकिन कोई भी उनकी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है।
इधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता थराली जगदीश रावत का कहना है कि पहले यह पुल जिला पंचायत का था। जो 2013 की आपदा में बह गया था, लेकिन अब गदेरे में स्पान अधिक होने से ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग को पुल बनाने को लेकर आग्रह किया था। पुल का स्टीमेट शासन को भेजा गया है। स्वीकृत होने पर पुल का कार्य शुरू किया जायेगा।

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