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नेशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट : कलंक का जिम्मेदार कौन है? सरकार या फिर आप और हम ?

13-01-2020 14:22:57 By: एडमिन

देहरादून (प्रदीप रावत "रवांल्टा"): देवभूमि के नाम एक कलंक ये लगा कि उत्तराखंड शराब पीने में देश के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा पीते हैं। फिर भी सरकार दारू की फैक्ट्री लगाने पर पूरा जोर लगा रही है। दूसरा जो कलंक लगा है। वो पहले वाले कलंक से ज्यादा शर्मनाक तो है ही, बेहद चिंताजन और खतरनाक भी है। हम अपनी ही बेटियों को दरिंदों के हाथों बेच दे रहे हैं। दरिंदे आते तो शरीफों की शक्ल में हैं, लेकिन असल में उनके अंदर सैतान छुपा होता है। ऐसा राक्षस, जिसे बेटी से ज्यादा उसके जिस्म को बेचकर मिलने वाले चंद पैसों से प्यार है। ये कोई हवाई बात नहीं है। देश के ऐसे संस्थान से बाहर निकली है, जिस संस्थान पर पूरे देश की जिम्मेदारी है। वो संस्थान देश को बताता है कि देश में किस तरह के अपराध पैर पसार रहे हैं। तय यह करना है औरको करना है कि उत्तराखंड के माथे पर लगे कलंक का जिम्मेदार कौन है? सरकार या फिर आप और हम ?

 

 

नेशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट

नेशनल क्राइम ब्यूरो ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में उत्तराखंड के लिए बेहद चिंता की बातें हैं। देशभर के राज्यों में होने वाले अपराधों की समीक्षा रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट में उत्तराखंड को लेकर भी कई बड़ चैंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शराब पीने में उत्तराखंड का औसत राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। दूसरा मामला बहुत गंभीर है। उत्तराखंड के नाम पर एक ऐसा कलंक लगा है, जिसे धोना शासद ही संभव हो पाएगा, लेकिन अगर जल्द नहीं जागे तो दिक्कतें और बढ़ जाएंगी। नेशनल क्राइम ब्यूरों के आंकड़ों में महिलाओं के अपहरण या मानव तस्करी में भी उत्तराखंड के देश के हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर है।
 

 

हिमालयी राज्यों में पहले पायदान पर

मानव तस्करी जैसे संगीन अपराध के मामलों में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में पहले पायदान पर है। खासकर महिलाओं की तस्करी के मामले में। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 के मुकाबले 2018 में महिलाओं की तस्करी के मुकदमों और पीड़िताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक 2018 में मानव तस्करी के 29 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 58 पीड़िताएं हैं। जबकि 2017 में 20 मुकदमों में 34 पीड़िताएं थीं।
 

 

मानव तस्करी को सबसे आसान

उत्तराखंड में शादी के नाम पर होने वाली मानव तस्करी को सबसे आसान माना जाता है। मानव तस्कर खुद सामने आने के बजाय दलाल के माध्यम से सौदेबाजी करते हैं।सौदा हो जाने के बाद लड़की को परिजनों के साथ प्रदेश से बाहर बुलवा लेते हैं, जिस कारण इन मामलों का खुलासा नहीं हो पाता है। ऐसे में मानव तस्करी को आंकड़ों में बांधा नहीं जा सकता। 58 महिलाओं में से 40 महिलाएं ऐसी रहीं, जिन्हें यौन व्यापार के लिए शादी के नाम पर ठग कर ले जाया गया।