एक साल बेमिशाल , राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने किया कमाल

Publish 06-04-2019 16:14:04


एक साल बेमिशाल , राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी  ने किया कमाल

गढ़वाल : अनिल बलूनी उत्तराखंड से राज्यसभा  सांसद  बहुत तेजी से राजनीति की नई धुरी जरूर बन गए हैं। उन्होंने राज्यसभा सांसद बनने के बाद कुछ ऐसे काम किए हैं, जिन कामों ने उनको लोगों के दिलों में जगह दे दी। बलूनी अचानक से लोगों के लिए उम्मीद बनकर उभरे हैं। उन्होंने अपने 12 माह के छोटे कार्यकाल में 12 बड़े काम कर दिए। इन्ही कामों के चलते लोग, उनसे ज्यादा उम्मीद लगाए हुए हैं। यह उन पर निर्भर करता है कि वो अपने पिछले 12 माह के कार्यकाल की तरह ही आगे भी जनता की उम्मीदों पर खरा उतर पाते हैं या नहीं। उनके राजनीतिक विरोधी भी उनकी राह में रोड़े अटकाने का काम करेंगे। राजनीति में कंपिटीशन नया नहीं है। दलों के बाहर और दल के भीतर दोनों ही जगह, दुश्मनों से पार पाना होता है। जिस तरह से पिछले कुछ समय से समीकरण बदले हैं। वो अनिल बलूनी के राजनीतिक भविष्य को ऊंची उड़ान देने वाले साबित तो होंगे ही। साथ ही उनको सावधान भी रहना होगा।

अनिल बलूनी ने अपने कार्यकाल का एक साल पूरा कर लिया है। 12 माह के छोटे कार्यकाल में अनिल बलूनी बड़े बनकर उभरे हैं। भाजपा का राष्ट्रीय मीडिया कॉर्डिनेटर होने के इतर भी उनकी अपनी पहचान बनी है। केवल पहचान बनाना ही जरूरी नहीं है, जो पहचान बनी है और जो भरोसा लोग करते हैं। उसे बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने अपने अब तक के एक साल के कार्यकाल में घोषणाएं कर जो वादे लोगों से किए थे। उनको पूरा कर दिखाया है।

अनिल बलूनी इसलिए भी जनता के चहेते बन रहे हैं कि उन्होंने नेतागिरी के पुराने फंडे को छोड़कर नए हिसाब से अपनी राजनीतिक कार्यशैली से काम करना शुरू किया है। राज्यसभा सांसद बनने के बाद अनिल बलूनी ने होर्डिंग, पोस्टर, अभिनंदन और स्वागत समरोह में शामिल होने से इंकार कर दिया। उनकी यह बात कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतरी, लेकिन बाद में उनकी इस मुहिम के अच्छे परिणाम आने शुरू हुए। उनका मानना है कि उद्घाटन के तामझाम पर पैसा खर्च करने से बेहतर है कि वो पैसा लोगों के काम आए। लोगों को उसका लाभ मिलेगा। उनकी यह मुहिम लोगों को काफी पंसद आ रही है। लोग उनके कामों की सराहना करने लगे हैं। उन्होंने कोटद्वार और उत्तरकाशी में अस्पतालों में आईसीयू सेंटर खोले। जिसका शुभारंभ अस्पताल से रिटार्ड हो रहे कर्मचारियों ने किया।

राज्यसभा सांसद बलूनी ने बड़े कामों की घोषणा की ओर उनको पूरा करने में जुट गए। उनहाके इन कामों को पूरा करने में पीएम मोदी से लेकर पूरी मोदी सरकार का साथ मिला। पीएम मोदी का उत्तराखंड को लेकर हमेशा से सकारात्मक नजरिया रहा है। उनका उत्तराखंड से लगाव साफ झलकता है। बलूनी की मानें तो मेादी सरकार की संवेदनशीलता, त्वरित काम करने की नीयत ने साबित किया कि ऐसे ही मोदी सकरकार लोगों की लोकप्रिय सरकार नहीं बनी।
अनिल बलूनी ने अपने कार्यकाल में नैनी-दून एक्सप्रेस का संचालन कराया। राज्य को एनडीआरएफ की अलग बटालियन दिलाई। कोटद्वार-उत्तरकाशी चिकित्सालयों में आईसीयू, वेंटीलेटर। पौड़ी के बौर गांव को गोद लेना, सेना और अर्ध सेना के अस्पतालों में आम जनता के उपचार की सुविधा के लिए काम करना। अब तक आईटीबीपी अस्पतालों में आम लोगों को उपचार मिलना शुरू भी हो चुका है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों के विषय की पैरवी कर उनके डूबते भविष्य को बचाने का काम किया। मसूरी पेयजल योजना के लिए 187 करोड स्वीकृत करने के साथ ही नैनीताल पेयजल योजना के लिए भी प्रयास तेज कर दिए। बलूनी ने तीलू रौतेली और माधो सिंह भंडारी के स्मारकों को पुरातत्व विभाग से संरक्षित कराने का भी काम किया। टनकपुर-बागेश्वर, बागेश्वर-चैखुटिया,चैखुटिया-गैरसैंण,गैरसैण-कर्णप्रयाग रेललाइन के सर्वे के लिए बजट स्वीकृत कराया। रामनगर और ऋषिकेश बसपोर्ट की स्थापना के लिए काम किया। दूरदर्शन से उत्तराखंड को 24 घंटे प्रसारण करने के लिए डीडी उत्तराखंड दिलाने का काम भी किया। इसके साथ ही सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी में तिमारदारों के लिए रैनबसेरा बनाने की दिशा में भी तेजी से काम शुरू कर दिया है।

अनिल बलूनी को इस साल 11 माह मिले। उन्होंने बताया कि उनके पास अगले साल काम करने के लिए केवल 10 माह का समय होगा। ऐसे में वो पूरी ताकत से जनता के हितों के कार्यो  को करने का प्रयास करेंगे। अनिल बलूनी ने जिस तेजी से काम किया है। वो जनता की नब्ज को टटोलने में सफल नजर आते हैं। इससे उनका राजनीतिक कद भी बढ़ा है। प्रदेश में रहते हुए अनिल बलूनी कम चिर्चित थे, लेकिन भाजपा राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख बनने के बाद वो देशभर में चर्चा में आ गए। उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद बनने को लेकर भी उनकी ज्यादा चर्चा नहीं थी। लेकिन, उनको पार्टी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया। उन्होंने अपने मनोनयन को सही साबित भी कर दिखाया।

उनके इस छोटे कार्यकाल के दौरान छोटी-छोटी राजनीतिक विवाद की अनदेखी करने लायक घटनाएं भी सामने आई। उन घटनाओं को भले ही खबरों में ज्यादा जगह नहीं मिल पाई हो, लेकिन बलूनी ने उन घटनाओं को जरूर महसूस किया होगा और भविष्य की योजनाओं को लेकर उन पर काम करना भी शुरू कर दिया होगा। बहरहाल, तेजी से लोकप्रिय होते अनिल बलूनी को धरातल पर जमे रहना होगा।

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