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विलुप्त होती उत्तराखण्ड की ढोल दमाऊ परम्परा , जाने पूरी खबर

08-12-2018 20:58:55


कोटद्वार/गढ़वाल | खोह नदी में रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत मलबा उठाने को लेकर यूपी और उत्तराखंड के खनन कारोबारियों के बीच हुआ विवाद अभी थमा भी नहीं कि अब खनन कारोबारियों के खिलाफ ग्रामीण भी मुखर होने लगे हैं। काशीरामपुर तल्ला निवासी राजेश नौटियाल ने आमरण अनशन पर बैठ गए, वहीं ग्रामीण भी अनशन का समर्थन करने लगे हैं।
खोह नदी में रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत मलबा उठा रहे खनन कारोबारियों की मुसीबतें कम होती नजर नहीं आ रही है। दरअसल पहले खोह नदी में गाड़ियां भरने को लेकर उत्तराखंड और यूपी के कारोबारियों के बीच मारपीट हुई और यह मामला अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि अब खोह नदी में रिवर ट्रेनिंग के तहत उत्तराखंड की सीमा में हो रहे खनन के विरोध में स्थानीय लोग भी मुखर होने लगे है। जहां सनेह पट्टी के विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने 20 अप्रैल को विशाल जुलूस प्रदर्शन के साथ ही प्रदेश सरकार का पुतला फूंकने का ऐलान किया है। वहीं अब काशीरामपुर तल्ला के ग्रामीणों ने भी मलबा उठाने का विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को काशीरामपुर तल्ला निवासी राजेश नौटियाल नदी के तपड़े में आमरण अनशन पर बैठ गए है। वहीं ग्राम आमरण अनशन के समर्थन में उतरने लगे है। ग्रामीण सत्यपाल ने कहा कि खनन कारोबारियों द्वारा रिवर ट्रेनिंग नीति 2016 के मानकों का खुल्लमखुल्ला उलंघन किया जा रहा है। स्थिति यह है कि ग्रामीणों ने गांव के लिए खतरा बनी खोह नदी के बीच में बने टापू जो खोह नदी के बहाव को दो भागों में विभाजित करता है पर बाढ रोकने के लिए शीशम और सागौन के पेड़ लगाए गए है को उखाड़ा जा रहा है। इसके अलावा मलबा उठाने में भारी मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि रिवर ट्रेनिंग के तहत केवल डेढ़ मीटर गहराई तक ही मलबा उठाया जाना चाहिए लेकिन खनन कारोबारी ने मानक के विपरीत कई मीटर गहरे खड्डे खोद दिए हैं। जिससे खोह नदी के किनारे बसे गांवों को बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने नदी में हो रहे खनन को अविलंब बंद करने की मांग उठाई है। आमरण अनशन का समर्थन करने वालों में पंकज नौटियाल, बिजेंद्र त्यागी, प्रवीन थापा, सत्यपाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।