कोटद्वार नगर निगम चुनाव : भाजपा सरकार की साख दाव पर, कांग्रेस में नहीं है ऑल इज वेल, विभा चौहान की भी है कड़ी टक्कर

Publish 01-11-2018 18:24:19


कोटद्वार नगर निगम चुनाव : भाजपा सरकार की साख दाव पर, कांग्रेस में नहीं है ऑल इज वेल, विभा चौहान की भी है कड़ी टक्कर

कोटद्वार/गढ़वाल ।   देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल का द्वार कहे जाने वाले कोटद्वार में  लगभग तीस हजार जनसंख्या वाली नगर पालिका परिषद में कथित रूप से जबरिया मिलाई गई 35 ग्राम पंचायतों की एक लाख जनसंख्या वाले भाबर क्षेत्र से बना कोटद्वार नगर निगम में पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं। जाहिर है कोटद्वार नगर पालिका परिषद को अपडेट कर बने नगर निगम के मेयर पद चुनाव भी होना है। मेयर पद के चुनाव के लिए भाजपा, कांग्रेस, बसपा, उक्रांद व लोक जनशक्ति पार्टी ने अपने उम्मीदवार खडे़ किए हैं।लगभग एक लाख तीन हजार मतदाताओं वाले कोटद्वार नगर निगम की मेयर सीट पर भले भाजपा व कांग्रेस के अलावा अन्य दलों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की है किन्तु अभी तक इस सीट पर जिसमें एक विधायक का निर्वाचन भी होता है, पर अभी तक भाजपा और कांग्रेस में ही सीधा मुकाबला होता आया है। परन्तु इस बार मेयर के चुनाव में लगता है कोटद्वार अपने स्वभाव के अनुसार एक और अलग फैसला देने जाएगा। कोटद्वार विधानसभा वर्ष 2002 में अस्तित्व में आई थी। इस विधानसभा सीट में कालागढ़ के मतदाताओं को छोड़कर शेष सीट को नगर निगम बनाया गया है। कहा जा सकता है कि नगर निगम मेयर व विधायक के निर्वाचन में बराबर मतदाता फैसला सुनाएगें।कोटद्वार क्षेत्र के मतदाता इस सीट पर अपने स्वभाव के अनुसार अप्रत्याशित फैसला सुनाते आये हैं।

2002 में जहां कांग्रेस के सुरेन्द्र सिंह नेगी को विजय बनाया वहीं 2007 में उन्हें हराकर नए चेहरे शैलेन्द्र सिंह रावत को विधायक बनाया तो 2012 में प्रदेश के मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खण्डूडी को हराकर फिर सुरेन्द्र सिंह नेगी को विधायक बनाया। 2017 में जनता ने डॉ0 हरक सिंह रावत को जिताकर सुरेन्द्र सिंह नेगी को आराम दे दिया।इस बार नगर निगम के मेयर पद के लिए भाजपा की ओर से लैंसडोन के विधायक दलीप सिंह रावत की पत्नी नीतू रावत को प्रत्याशी बनाया गया है। चूंकि भाजपा प्रत्याशी नीतू रावत के पति लैंसडोन क्षेत्र से विधायक हैं इसलिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में इस बात का लेशमात्र भी अंदेशा नहीं था कि स्थानीय विधायक की उपेक्षा कर दूसरे क्षेत्र के विधायक को कोटद्वार में तबज्जो देकर उनकी पत्नी को पार्टी प्रत्याशी बनाया जाएगा। लैंसडोन क्षेत्र के विधायक दलीप रावत की पत्नी नीतू रावत को कोटद्वार मेयर का टिकट देकर भाजपा ने शायद दो साल पहले कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आये क्षेत्रीय विधायक डॉ. हरक सिंह रावत को साधने का काम किया है। किन्तु भाजपा ने मेयर पद के लिए अग्रिम पंक्ति में खडे पूर्व जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह चौहान की पत्नी विभा चौहान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य वरिष्ठ भाजपा नेत्री सुधा सती व पूर्व पालिकाध्यक्ष शशि नैनवाल की अनदेखी कर अपने पैरों में कल्हाडी मारने का काम जैसा किया है।ऐसी स्थिति में भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा चुनौती अपने ही कुनबे से मिल रही है। क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के काबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत कोटद्वार मेयर के लिए पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर मायूस बताये जा रहे हैं। जबकि क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले धीरेन्द्र चौहान ने अपनी पत्नी विभा चौहान को भाजपा बागी प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा है। वही उपरोक्त दोनों भाजपा की वरिष्ठ नेता सुधा सती व शशि नैनवाल भी बागी प्रत्याशी के रूप में मैदान में खड़ी हैं। निश्चित रूप से भाजपा के ये तीनों बागी प्रत्याशी जनता के बीच जाकर सबसे पहले भाजपा द्वारा उनके साथ किए गए अन्याय और उसके कारण जनता के सामने रखेंगें। ऐसा होने से भाजपा प्रत्याशी को खासी चुनौती मिल रही है। इन बागियों द्वारा भाजपा की टिकट वितरण को परिवारवाद का मुद्दा बनाया गया है। जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं व अन्य नेताओं का रूझान भी इन तीनों बागियों की ओर बढ़ने लगा है।

दूसरी तरफ क्षेत्रीय विधायक की उपेक्षा को उनके समर्थक अभी पचा नहीं पाये हैं। जिससे इनका रूझान भी बागी प्रत्याशियों के पक्ष में जाएगा। ऐसा होने पर भाजपा को कांग्रेस की चुनौती से ज्यादा भाजपा बागियों की चुनौती भारी पड़ेगी।दूसरी ओर कोटद्वार नगर निगम की मेयर पद पर भले ही कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व काबीना मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी की पत्नी हेमलता नेगी के खिलाफ कांग्रेस में खुलकर बगावत नहीं हुई है, लेकिन टिकट के दावेदारों को इस बात पर झटका जोर से लगा है कि कोटद्वार में सुरेन्द्र सिंह नेगी के रहते हुए उनका कोई राजनीतिक भविष्य नहीं रह गया है। यद्यपि कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ कोई बगावत न हुई हो, लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं में इस बात को लेकर आंतरिक रोष सुनाई दे रहा है कि विधायक और मेयर का टिकट एक ही परिवार को दिया जाना कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भविष्य को अंधकार में धकेलना जैसा है।मेयर चुनाव में कांग्रेस के अंदर सुलग रही रोष का धुआं अगर आग में तब्दील हुआ तो ऐसे कांग्रेसी मतदाता भाजपा के बजाये सक्षम निर्दलीय को अपना वोट कर सकते हैं। कांग्रेस के अंदर एक बात बहुत तेजी से चल रही है कि 1984 में सुरेन्द्र सिंह नेगी के विधायक बनने के 34 साल बाद भी कोटद्वार में कांग्रेस का एक भी नेता आगे नहीं बढ़ पाया है जो कि विधायक या मेयर की दावेदारी के लिए मजबूत समझा जाता हो। ऐसी स्थिति में स्पष्ट कहा जा सकता है कि इस बार कांग्रेस में मेयर के चुनाव को लेकर सब कुछ ठीक ठाक (ऑल इज वेल) नहीं है।मुख्य मुकाबले में रहने वाली भाजपा व कांग्रेस के द्वारा विधायक पत्नियों को टिकट दिए जाने से कोटद्वार नगर निगम की जनता भी बहुत खुश नहीं है।

सोशल मीडिया पर दोनों पार्टियों द्वारा परिवारवाद को पनपाने के खिलाफ जबरदस्त मुहिम चल रही है । साथ ही आहवान किया जा रहा है कि इस बार कोटद्वार से राष्ट्रीय दलों की परिवारवाद पनपाने की मुहिम को सबक सिखा कर प्रदेश व देश को फिर एक नया संदेश दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो भाजपा के बागी प्रत्याशियों में से दौड़ में सबसे आगे आने वाले प्रत्याशी के भाग्य का सितारा चमक सकता है। यदि धरातल पर जाकर देखे तो कोटद्वार नगर निगम चुनाव में भाजपा से बागी हुए पूर्व जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र चौहान का पलड़ा कही न कही भारी नजर आ रहा है क्योकि स्थानीय लोगो का  सोशल मिडिया में राष्ट्रीय दलों व परिवारवाद के खिलाफ जिस तरह मुहीम छिड़ी है उसे देखकर तो यही लगता है कि हो न हो इस मुहीम का फायदा व टिकिट कटने की सहानुभूति चुनाव में देखने को मिल रही है  । 

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