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देवभूमि में काफल न खाया तो क्या खाया ।

29-05-2019 19:33:57

कोटद्वार (गौरव गोदियाल) । देवभूमि उत्तराखंड में फलों में एक बेहद लोकप्रिय नाम है. काफल। एंटी.ऑक्सीडेंट गुणों के कारण यह हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है। काफल एक जंगली फल है इसे कहीं उगाया नहीं जाता बल्कि अपने आप उगता है और हमें मीठे फल का तोहफा देता है।देवभूमि उत्तराखंड आने वाले शख्स ने अगर काफल का स्वाद नहीं लियाए तो फलों का स्वाद अधूरा रह जाता है ।गर्मी के मौसम में बस स्टैंड श्रीनगरएपौडीए सतपुलीए गुमखालए रुद्रप्रयागए कर्णप्रयाग से लेकर अनेक बाजारों में ग्रामीण काफल बेचते हुए दिखाई देते हैं । मई और जून में काफल पक जातेए महिला बेहद खुश हो जाती है । उसे घर चलाने के लिए एक आय का जरिया मिल जाता है इसलिए वह जंगल से काफल तोड़कर उन्हें बाजार में बेचतीए जिससे परिवार की मुश्किलें कुछ कम हो जााती है। गर्मी के मौसम में कई परिवार काफल को जंगल से तोड़कर बेचने के बाद अपनी रोजी.रोटी की व्यवस्था करते हैं ।छोटा गुठली युक्त बेरी जैसा ये फल गुच्छों में आता है और पकने पर बेहद लाल हो जाता हैए तभी इसे खाया जाता है ।वहीं ये पेड़ अनेक प्राकृतिक औषधीय गुणों से भरपूर है ।इसकी छाल विभिन्न औषधियों में प्रयोग होती है ।खास बात यह है कि इतनी उपयोगिता के बावजूद काफल बाहर के लोगों को खाने के लिए नहीं मिल पाता क्योंकि काफल ज्यादा देर तक रखने पर खाने योग्य नहीं रहता है । यही वजह है उत्तराखंड के अन्य फल जहां आसानी से दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं। वहीं काफल खाने के लिए लोगों को देवभूमि ही आना पड़ता है।