उषा सजवाण कि दावेदारी से बढ़ी मेयर प्रत्याशियों कि मुश्किलें , जाने पूरी खबर

Publish 18-10-2018 16:52:29


उषा सजवाण कि दावेदारी से बढ़ी मेयर प्रत्याशियों कि मुश्किलें , जाने पूरी खबर

राष्ट्रपति से डीजी डिस्क से सम्मान प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला
उषा सजवाण कि दावेदारी ने भाजपा कांग्रेस सहित सभी मेयर पद के सम्भावित प्रत्याशियों का बिगाड़ा गणित
हिंदूवादी नेता और पतंजलि गढ़वाल संभाग अध्यक्ष अमित सजवाण की पत्नी हैं ऊषा सजवाण
कोटद्वार ।
ऊषा सजवाण ने भाजपा से कोटद्वार नगर निगम मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। नाम से भले ही नया चेहरा हो, लेकिन यदि उनकी योग्यता की बात की जाय तो वह सशस़्त्र सीमाबल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। अधिवक्ता, हिंदू संगठन और पंतजलि योग समिति के गढ़वाल संभाग के अध्यक्ष और आरएसएस की पृष्ठभूमि से जुड़े अमित सजवाण की पत्नी है, इसलिए उनकी दावेदारी भी भाजपा में कम नहीं आंकी जा सकती है। हालांकि गुरुवार  को कोटद्वार नगर निगम प्रभारी डा.हरक सिंह रावत और कैलाश शर्मा  ने कोटद्वार में प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा कि है


भाजपा से दावेदारी करने वालों में कई महिला महानुभाव हैं, लेकिन अमित सजवाण की पत्नी ऊषा सजवाण की बात करें तो योग्यता के आधार पर वह भाजपा की सबसे प्रबल दावेदार कही जा सकती हैं। ऊषा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि हासिल की है। सशस्त्र सीमा बल में कार्य करते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र की महिलाओं को गुरिल्ला युद्ध और गुप्तचर का प्रशिक्षण प्रदान कर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है। उन्होंने देश की प्रमुख जांच एजेंसी आईबी और रॉ से गुप्तचरी का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। उनके अच्छे कार्यो को देखते हुए वर्ष 2015 में उन्हें अर्द्धसैनिक बल को मिलने वाले प्रतिष्ठित सम्मान भारतीय पुलिस पदक से नवाजा गया।

दो बार वह भारत के राष्ट्रपति से डीजी डिस्क से सम्मान प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। ऐसे में कोटद्वार नगर निगम की पहली मेयर के लिए भाजपा से दावेदारी प्रस्तुत कर उन्होंने अभी तक मेयर पद के लिए ताल ठोक रही सभी महिला दावेदारों की मुश्किलें बढा दी हैं।

इसके अलावा भाजपा पार्टी हाई कमान की ओर से तैनात नगर निगम प्रभारी डा. हरक सिंह रावत और कैलाश शर्मा को भी अब पुनः सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। यदि उनको पार्टी की ओर से मेयर पद के लिए प्रत्याशी घोषित किया जाता है, तो विपक्ष को भी एक बार फिर से अपने प्रत्याशी के नाम पर विचार करना पड़ सकता है। क्योंकि कोटद्वार भाबर में पूर्व सैनिकों की अच्छी खासी तादात है और उनके प्रत्याशी बनने से पूर्व सैनिकों का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा वास्तव में किस प्रत्याशी पर अपना दांव लगाती है। 

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