आक्सीजन हब बने उत्तराखण्ड

Publish 14-12-2018 19:15:05


आक्सीजन हब बने उत्तराखण्ड

गढ़वाल (सुभाष चन्द्र नौटियाल): आज जहां विश्व के विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के हल ढूंढने के निरन्तर प्रयास कर रहे हैं। बढते प्रदूषण के कारण सांस लेने के लिए शुद्ध वायु तक नसीब नहीं हो पा रही है। वहीं अब विश्व में माइक्रो क्लाइमेट जोन (सूक्ष्म जलवायु क्षेत्र) विकसित किये जाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। विश्व में कुछ वैज्ञानिक इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं तथा ऐसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं जिससे क्षेत्र विशेष (घर के आस-पास) तथा व्यक्ति विशेष को प्रदूषित वातावरण में शुद्ध वायु की सप्लाई की जा सके। वैज्ञानिकों की इस शोधपूर्ण कार्यों को बाजार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियां बाजार में नये उत्पात तैयार कर रही है। यह कम्पनियां शुद्ध हवा वाले क्षेत्रों से हवा पैक कर आवश्यकतानुसार अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में बेच रहे हैं।। हिमालयी राज्यों से नित ताजी हवा की सप्लाई प्रदूषित वाले क्षेत्रों को की जा रही है।

उत्तराखण्ड सहित हिमालयी राज्यों की साफ, स्वच्छ, शद्ध तथा ताजी हवा की पैंकिग कर देश-विदेश के बाजारों में बेचा जा रहा है। एक एयर बैग की कीमत 399 से लेकर 550 तक है। सप्लाई ऑन लाइन बुक की जा सकती है। इसी प्रकार घर के वातावरण को शुद्ध रखने के लिए 7.5 लीटर एयर बैग की कीमत रु.1399 तथा 15 लीटर एयर बैग की कीमत रु.1999 तक है। ज्ञात हो कि एक व्यक्ति को सांस लेने के लिए लगभग 18000 प्रति लीटर प्रति दिन शुद्ध वायु की आवश्यकता होती है। उत्तराखण्ड के केदारनाथ तथा जम्मू-कश्मीर के लेह-लद्दाख की शुद्ध हवा की पैकिंग कर देश-विदेशों में बेचकर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने शुद्ध मुनाफे का नया कारोबार के लिए बाजार तैयार कर दिया है। ज्ञात रहे विकासवाद की अति आधुनिकतम सोच तथा बढ़ते औघोगिकीकरण के कारण विश्व के अधिकतर बड़े शहर प्रदूषण की भयंकर मार झेल रहे हैं। सुविधा भोग के कारण विश्व शहरों की यह हालत हुई है। जिसके कारण इन शहरों में सांस लेने के लिए शुद्ध हवा तक नसीब नहीं हो पा रही है। यह भी विडम्बना ही है कि विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 शहर भारत के हैं। जबकि हमारा देश भारत विकासशील देशों की श्रेणी में आता है। विश्व में जीने के लिए सांसों को खरीदने का व्यवसाय जोर पकड़ रहा है जबकि जहां से कारोबार के लिए सांसों की पैकिंग की जा रही है उस क्षेत्र के लोग गहरी नींद में सो रहे हैं। राज्य सरकार बेखबर है। आमजन सुस्त है, व्यवसायी मस्त हैं।
 71 फीसद भू-भाग वाला हिमालयी राज्य ऑक्सीजन हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। उत्तराखण्ड राज्य में माइक्रो क्लाइमेट जोन (सूक्ष्म जलवायु क्षेत्र) विकसित करने के लिए आदर्श वातावरण है। उत्तराखण्ड में इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा सकता है तथा पर्यटकों को शुद्ध प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ यहां की शुद्ध हवा की पैंकिग कर देश-विदेशों में भी उपलब्ध करायी जा सकती है बस इसके लिए सरकार को दृढ़ इच्छा शक्ति से कार्य करना होगा यदि सरकार इस दिशा में गंभीरता के साथ योजनाबद्ध ढंग से कार्य करती है तो शुद्ध और बेहतर हवा के कारण राज्य में स्वयं ही पर्यटन भी बढ़ेगा तथा आय के साधन विकसित होंगे। उत्तराखण्ड की इस पहल से जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे स्थानों के लिए वरदान भी साबित होगा।

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