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जाने क्यो हैं महत्वपूर्ण पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन

05-06-2019 19:53:49

चमोली (संतोष नेगी):  पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ भारतीय  मनीषियों ने पहले से ही आवाज उठाई है जिसका प्रमाण हम इस श्लोक से दे सकते है ॐ शन्तिरक्षः ग्वं शान्तिः पृथ्वी शान्तिः रापः शान्तिः रोषधयः शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः वनस्पतयः शान्तिः विश्वे  देवाः शान्तिः ब्रह्म शान्तिः सर्व ग्वं शान्तिः शान्तिरेवः शान्ति का मंत्र देकर लोगो को बताया कि अंतरिक्ष मे संचरण से अंतरिक्ष का वातावरण प्रदूषित हो रहा है इसलिए शान्तिः की आवश्यकता है इसके साथ ही पृथ्वी पर भी अशान्ति है जिसके शान्ति जरूरी है। प्रकृति के दोहन होने से औषधियां भी नष्ट हो रही है जिससे पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पर पड़ रहा है। आज हम सभी भारतीय मनीषियों की उस सोच का थोड़ा भी अनुसरण किये होते तो आज यह दिन देखने को नही मिलता। आज हम  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण से युक्त और   स्वच्छ वातावरण देने , जल संरक्षण के साथ ही नशा मुक्त विषय पर आवाज उठाना आवश्यक है।

पर्यावरण उन सभी भौतिक, रासायनिक एवं जैविक कारकों की कुल इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा पारितंत्रीय आबादी को प्रभावित करते हैं तथा उनके रूप, जीवन और जीविता को तय करते हैं। पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म जीवाणु से लेकर कीड़े-मकोड़े, सभी जीव-जंतु और पेड़-पौधों के अलावा उनसे जुड़ी सारी जैव क्रियाएं और प्रक्रियाएं भी शामिल हैं । जबकि पर्यावरण के अजैविक संघटकों में निर्जीव तत्व और उनसे जुड़ी प्रक्रियाएं आती हैं, जैसे: पर्वत, चट्टानें, नदी, हवा और जलवायु के तत्व इत्यादि। सामान्य अर्थों में यह हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक तत्वों, तथ्यों, प्रक्रियाओं और घटनाओं से मिलकर बनी इकाई है। यह हमारे चारों ओर व्याप्त है और हमारे जीवन की प्रत्येक घटना इसी पर निर्भर करती और संपादित होती हैं।

मनुष्यों द्वारा की जाने वाली समस्त क्रियाएं प र्यावरण को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।  इस प्रकार किसी जीव और पर्यावरण के बीच का संबंध भी होता है, जो कि अन्योन्याश्रि‍त है। मानव हस्तक्षेप के आधार पर पर्यावरण को दो भागों में बांटा जा सकता है, जिसमें पहला है प्राकृतिक या नैसर्गिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण।  यह विभाजन प्राकृतिक प्रक्रियाओं और दशाओं में मानव हस्तक्षेप की मात्रा की अधिकता और न्यूनता के अनुसार है। पर्यावरणीय समस्याएं  प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन इत्यादि मनुष्य को अपनी जीवनशैली के बारे में पुनर्विचार के लिये प्रेरित कर रही हैं और अब पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन की आवश्यकता महत्वपूर्ण है।