विशेष आस्तीन से मेंढक : राजनीति का खेल: आस्तीन का सांप तो सुना ही होगा, आस्तीन से मेंढक भी निकल आए

Publish 02-04-2019 22:56:27


विशेष आस्तीन से मेंढक : राजनीति का खेल: आस्तीन का सांप तो सुना ही होगा, आस्तीन से मेंढक भी निकल आए

देहरादून (प्रदीप रावत "रवांल्टा"):  इन दिनों लोकसभा चुनाव का शोर पूरे देश में सुनाई दे रहा है। नेता चुनावी मोड़ में हैं। चुनावी शोर में एक दूसरे के खिलाफ साजिशों का दौर भी चल रहा है। विरोधियों के खिलाफ तो हर कोई साजिश करता है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो अपनों को ही ठिकाने लगाने का मौका तलाशते नजर आते हैं। इनका काम साजिश रचने का होता है। हरकतें छोटी होती हैं, लेकिन राजनीति लिहाज से उसका बड़ा घाटा उठाना पड़ता है। आपने आस्तीन का सांप तो सुना ही होगा, लेकिन चुनावी माहौल में आस्तीन से मेंढक भी फुदकते हुए बाहर निकल आ रहे हैं। आस्तीन के मेंढक शब्द इन दिनों राजनीति में छाया हुआ है। वास्तव में ये मेंढक ही हैं, लेकिन हैं जहरीले। इन मेंढकों के फुदकने का दौर चुनाव आते ही शुरू हो जाता है।
 उत्तराखंड में पहले चरण में मतदान होना है। समय ज्यादा नहीं बचा है। चुनावी शोर पूरे चरम पर है। फर्जी स्टारों को चुनावी सभाओं में चमकता हुआ दिखाया जा रहा है। अब आस्तीन के सांप और आस्तीन के मेंढकों के बारे में बताते हैं। आस्तीन के सांप की परिभाषा तो आप जानते ही हैं। अब आस्तीन के मेंढक के बारे में भी जान लें, दरअसल, ये आस्तीन के मेंढक वो नेता होते हैं, जो अपने आकाओं की कृपा से पद हासिल कर लेते हैं। लेकिन, इनका कोई एक-दो आका नहीं, बल्कि कई-कई आका होते हैं। ये हर किसी को मक्खन लगाते फिरते हैं। मौका देखते ही कमजोर पड़ते नेता को छोड़कर फुदकते हुए दूसरे मजबूत होते नेता की आस्तीन में जाकर छुप जाते हैं। इनके लिए एक और कहावत भी बन गई। अपना काम बनता, भाड़ में जाए नेता। अब तो समझ ही गए होंगे आस्तीन के मेंढक। नहीं भी समझें हों, तो भी चलेगा। पर सावधान जरूर रहिएगा।  

गढ़वाल लोकसभा सीट इस बार खासी चर्चा में है। कारण भी है। पूर्व सीएम जनरल बीसी खंडूड़ी के बेटे मनीष कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा खंडूड़ी के फोटो तो अपने पोस्टर-बैनर में चिपका रही है, पर खंडूड़ी समर्थकों को आस्तीन का फुदकता हुआ मेंढक समझ रही है। ये फुदकते हुए मेंझक इन दिनों कोटद्वार में ज्यादा नजर आ रहे हैं। अब खंडूडी जी को ही लेलो कहीं से इन तो कहीं से आउट। खंडूड़ी जी भी रायता बने हुए हैं। हर कोई उनको लेकर घबरा भी रहा है। जैसे मधुमेह वाला मरीज मीठा खाने से घबराता है।

अब कुछ गहरी बात करते हैं। कृप्या ध्यान दें। अतिउत्साही नेता सोच रहे हैं कि अपने करीबी नेता के विरोधी नेता को ठिकाने लगा दिया जाए। मौका है। जनाब नेता जी अपनों का धनिया काटकर सलाद में खाने पर तुले हैं। साजिश इतनी गहरी कि रायता भी केले का बना रहे हैं। आप समझ ही गए होंगे कि केले का रायता फैला और फिसले तो फिर कोई नहीं बचा सकता।

एक आस्तीन का मेंढक इस समय भाजपा प्रदेश नेतृत्व में फुदक रहा है। उस पर इतना बोझ लाद दिया कि उसे ढोते हुए उसके कंधे झुक रहे हैं, पर हेकड़ी पूरी है। बंदे ने आते ही दो पैग वाले पंडित जी का नाम-ऊउ की तख्ती ही उड़ा डाली। जनाब कामदार कम और नामदार ज्यादा हैं।  

कुछ मेंढक नैनीताल सीट पर भी फुदक रहे हैं। नैनीताल में मेंढक भाजपा के उम्मीदवार से कहीं ज्यादा भाग दा यानि भगत दा की ओर फुदक रहे हैं। उनको लगता है कि भाग दा की ओर फुदकने से जरूर कुछ काम बनेगा। इधर, कांग्रेसी आस्तीन के मेंढक भी कुछ कम नहीं हैं। हार दा यानि हर दा को सपने दिखाकर उनकी नींद हराम करने पर तुले हैं। भगवान मालिक है। राम बचाए इन नेताओं के प्रपंच से देश की जनता को।

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