...........साहू तुम्हें मेरा सलाम

Publish 01-11-2018 22:05:50


...........साहू तुम्हें मेरा सलाम

देहरादून( प्रदीप रावत "रवांल्टा")|  मुझे निर्भीक और निडर पत्रकारिता के जोखिम भी पता हैं। साहू भी उसी निडरता से अपने काम पर जा रहे थे और न्क्सस्लियों की गोलियों का शिकार हो गए। व्यक्तिगततौर पर अच्युतानंद साहू को नहीं जानता था, पर उनके जाने की खबर के बाद से जितना खबरों के जरिए और उनकी सोशल एक्टिविटी से उनको जान पाया। उससे पता चलता है कि साहू एक साहसी और होनहार कैमरामैन तो थे ही, वो एक जिंदादिल इंसान भी थे। साहू के साहस को सलाम। साहू की यह कोई पहली साहसिक कवरेज नहीं थी। इससे पहले भी साहू दूसरी खतरनाक जहगों पर मीडिया कवरेज कर चुके थे। वो भले ही हमारे बीच से सदा के लिए चले गए हों, लेकिन उनकी अपने काम के प्रति निष्ठा और मेहनत सबको प्रेरित करती रहेगी। साहू और उन दो जबांजों को श्रद्धांजलि..., जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गवांई।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाडा में दूरदर्शन टीम पर नक्सलियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई। हमले में दो जवान भी शहीद हो गए थे। ये हमला अरनपुर में हुआ। यह ऐसी जगह है, जहां पहली बार वोटिंग होने वाली है। दूरदर्शन की टीम उसी की रिपोर्टिंग के लिए वहां जा रही थी। मीडिया रिपोर्टों में सामने आई साहू की कवरेज बताती हैं कि साहू बेहद निडर पत्रकार था। वे कहीं भी जाने के लिए तैयार रहते थे। उनके भाई कहते हैं कि साहू को सियाचीन से भी डर नहीं लगता था। अच्युतानंद आर्मी में भी काम कर चुके थे। यह भी एक कारण था कि वो निडर थे। ओडिशा के घुसरामुडा गांव के रहने वाले साहू पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। साहू अपने पूरे परिवार को भी ख्याल रखते थे। इस बात की बहुत खुशी है कि वो जिस सूचना प्रसारण मंत्रालय में काम करते हैं। वह उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़ा नजर आ रहा है। आमतौर पर मीडिया संस्थान अपने कर्मचारियों के साथ कम ही खड़े नजर आते हैं। ऐसी कई घटनाएं सामने आ भी चुकी हैं।
मीडिया संस्थानों को इस तरह के हमलों से सीख लेनी चाहिए। सरकार को भी कुछ चिंता करने की जरूरत है। दअरसल, साहू जिस कवरेज पर गए थे, उसके लिए पूरी तैयारी नजर नहीं आई। जिस तरह नक्सलियों ने हमला किया, वो बताता है कि मीडिया कर्मियों के आने की उनको भनक लग चुकी थी। उन निजी संस्थानों को सबक सीखना चाहिए, जो अपने दिहाड़ी पर रखे पत्रकारों को भयंकर जोखिमों में झोक देते हैं और हादसा होने के बाद यह तक मामने को तैयार नहीं होती कि वो हमारा इंप्लाय था।

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