एन्वायरमेंट के विधार्थियों का आक्रोश

Publish 23-11-2017 15:19:34


एन्वायरमेंट के विधार्थियों का आक्रोश

देश में विभिन्न कोर्स शुरू तो कर दिए है पर बेरोजगारी के चलते उन कोर्सो को करने के बाद भी विधार्थी नौकरी के लिए तरस रहे है | आज हम बात करते है इनवारमेंटल साइंस से जुड़े  विधार्थीयों के द्वारा यह मेसेज वाट्सएप्प पर भेजा जा रहा है


भले ही आप पीएचडी कर रहे हैं चाहे किसी अच्छे इंस्टिट्यूट से आपने एमएससी किया है इन्वायरमेंटल साइंस में , कुछ भी हो लेकिन उसके बाद आपकी जो वैल्यू है वह जीरो है क्योंकि आप किसी भी डिग्री कॉलेज में अगर पढ़ाने के लिए भी जाएंगे तो फिर  आपको वहां जॉब नहीं मिलेगा आप की वैल्यू वहां पर जीरो ही रहेगी वहां पर केबल जूलॉजी बॉटनी वाले बंदे को ही वहां रखा जाएगा आपको नहीं रखा जाएगा तो यह तो यह मत समझिएगा कि मैं पीएचडी कर रहा हूं या कर रही हूं तो मेरी लाइफ सिक्योर है और मैं भारत के टॉप मोस्ट इंस्टिट्यूट से कर रही हूं या कर रहा हूं चाहे वह फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट हो चाहे बीएचयू हो चाहे जेएनयू हो चाहे दिल्ली यूनिवर्सिटी हो उसके बाद क्या जब तक आप कर रहे हैं या डिग्री ले रहे हैं तब तक आपका वहां पर नाम है शोहरत है इज्जत है सब कुछ है लेकिन उसके बाद ही  जैसे ही आपकी पढ़ाई कंप्लीट होगी आप की वैल्यू तुरंत जीरो हो जाएगी और आप घर पर बैठ जाएंगे कदम के पास एक ही ऑप्शन बचेगा कि चलो कहीं तैयारी कर लिया जाए चाहे बीएड कर लिया जाए या बीटीसी कर लिया जाए या किसी आदर फील्ड की जॉब के लिए हम अप्लाई कर दे या उसकी तैयारी में लग जाएं. जितना समय हम इंस्टिट्यूट में रहेंगे चाहे अपने कॉलेज में रहेंगे पढ़ाई करेंगे उतना समय हमें आभास नहीं होगा कि हमारे लाइफ में आगे फ्यूचर में क्या होगा या इसे हम को बेनिफिट मिलेगी कि नहीं लेकिन जब आप को ठोकर लगेगी तब आपको पता चलेगा , भले ही भारत के टॉप मोस्ट इंस्टिट्यूट में क्यों ना हो लेकिन उसके बाद क्या है   आप की डिग्री तुरन  जीरो हो जाएगी अगर प्राइवेट डिग्री कॉलेज में पढ़ाने जाएंगे ,  वहां पर भी आप को भगा दिया जाएगा कि नहीं मैं आपको नहीं लूंगा मैं माइक्रोबायोलॉजी वाले को ले लूंगा बायोटेक्नोलॉजी बालों को ले लूंगा तो  जूलॉजी को ले लूंगा, बॉटनी को ले लूंगा लेकिन मैं आपको नहीं लूंगा. मौका है हमें फिर से एक साथ एकजुट होना होगा और बड़े पैमाने पर एक आंदोलन करके अपने हक और सम्मान को हासिल कर लेना है भले ही क्यों ना हमें लाठी खाना पड़े  लेकिन अपने सम्मान और हक को ले लेना है यह समय बैठने और सोचने का नहीं है यह समय रणनीति बनाने का समय है और अपने हक और सम्मान के लिए , आज नहीं तो कल नहीं इसलिए लग जाओ ??

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