वर्तमान में अपनी पहचान खोता भारतीय युवा

Publish 13-12-2017 19:57:08


वर्तमान में अपनी पहचान खोता भारतीय युवा

वर्तमान में भारत कि जनसँख्या का 75% युवा वर्ग है |इस कारण भारत में एक स्लोगन भी प्रचलन में है |ये है यंगिस्तान इण्डिया कई कम्पनियां अपने विभिन्न उत्पादों से सम्बन्धित योजना भी यंगिस्तान को ध्यान में रखकर ही बना रही है |भारत की भारी भरकम युवा शक्ति भारत के लिए वरदान है |यह तो सही है लेकिन इस युवा शक्ति कि दिशा क्या है |वर्तमान समय में भारत के युवा कि स्थिति अत्यंत भ्रमात्मक है |
         आज के भारत का युवा परम्परा व आधुनिक पश्चिमीकरण पुर्विकरण, स्वदेशी विदेशी , धार्मिक कट्टरपंथी व धर्मनिर्पेक्ष युवा प्रोढ़ आदि कई प्रकार जो प्रचलन भारत में है तथा युवा वर्ग बड़े हि तरीके से इस सब के बीच फंसा है और अपने आपको हताश महसूस कर रहा है दुसरे शब्दों में कहे तो भारतीय युवा अपनी पहचान खो रहा है |
या यह खे कि भारतीय युवा वैश्विक युवा बनने के फेर में कही भारतीय युवा होने की अपनी पहचान भी खोता जा रहा है भारतीय युवा की इस समस्या में निम्न कारण प्रमुखता से चिन्हित किये जा रहे है |
सरकारी नीतियाँ - भारत कि सरकारी नीतियाँ युवाओ के बीच एक खाई पैदा कर रही है | जिसमे केवल कुछ लोगो को फायदा पहुँच रहा है और एक बड़ा युवा वर्ग इन नीतियों के लाभ से वंछित रह जाता है |यह भारत में आर्थिक असमानता का सूचक भी है |आर्थिक असमानता के कारण भारत का सामान्य युवा और अधिक गरीब तथा धनी वर्ग और अधिक धनी होकर अधिकतर संसाधनो के दोहन कर रहा है |ऐसा युवा जो संसाधनों का उपयोग नही कर पा रहा है उसकी संख्या भारत में लगभग 2 करोड़ है |इसमें से अधिकतर युवा विभिन्न प्रकार के अपराधो जैसे चोरी,लूट, ड्रग्स, अपहरण सम्बन्धित कार्यो में संलिप्त हो जाते है |जिससे विभिन्न प्रकार कि क़ानूनी कार्यवाहियां उन पर लागू होती है और अंत में उन्हें अपनी पहचान से ही लड़ना पड़ता है |

लेखिका - डॉ दीपा शर्मा

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