*** लाइव एसकेजी न्यूज़ पर आप अपने लेख, कविताएँ भेज सकते है सम्पर्क करें 9410553400 हमारी ईमेल है liveskgnews@gmail.com *** *** सेमन्या कण्वघाटी समाचार पत्र, www.liveskgnews.com वेब न्यूज़ पोर्टल व liveskgnews मोबाइल एप्प को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश राजस्थान, दिल्ली सहित पुरे भारत में जिला प्रतिनिधियों, ब्यूरो चीफ व विज्ञापन प्रतिनिधियों की आवश्यकता है. सम्पर्क 9410553400 *** *** सभी प्रकाशित समाचारों एवं लेखो के लिए सम्पादक की सहमती जरुरी नही है, किसी भी वाद विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र हरिद्वार न्यायालय में ही मान्य होगा . *** *** लाइव एसकेजी न्यूज़ के मोबाइल एप्प को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर से सर्च करे liveskgnews ***

जाने आलू की फसल के बारे में

29-10-2018 18:35:31

फतेहपुर चौरासी उन्नाव (रघुनाथ)| इस वर्ष किसानों ने आलू की बुवाई अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से शुरू की है जिन किसानों ने अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में बुवाई कर दी थी उनकी आलू की फसल दिसंबर के माह में तैयार हो जाएगी आलू के बोने वाले किसान क्षेत्र के दोस्तपुर शिवली निवासी घनश्याम पाल बताते हैं कि अक्टूबर के प्रथम माह में आलू बोने से  ऊपज अधिक मात्रा में होती है और उसमें रोग भी कम मात्रा में लगता है सिंचाई भी कम करनी पड़ती है और बाजार का भाव भी अच्छा मिल जाता है इसलिए हमने अपने खेत में आलू बोई है और इसकी निराई गुड़ाई में पूरा समय देता हूं करीब 3 बार सिंचाई कर चुका हूं दो बार निराई कर चुका हूं अब आलू में कुछ बार केवल सिंचाई करना बचा है उसके बाद आलू तैयार हो जाएगा दिसंबर के माह में जो अच्छे दामों में बिकेगी।


इसको निकालने के बाद गेहूं की बुवाई भी कर सकेंगे जिसमें उपज की कोई कमी नहीं होगी जानकार लोग बताते हैं कि आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है। आलू की खेती के लिए यह समय उपयुक्त है क्योंकि आलू के लिए छोटे दिनों की अवस्था की आवश्यकता होती है। भारत के किसी-किसी भाग में तो पूरे वर्ष आलू की खेती की जाती है। आपको बताते हैं कि इस समय आलू की खेती के लिए कौन-कौन सी किस्में है आलू की किस्में केंद्रीय आलू अनुसंधान शिमला की ओर से आलू की कई किस्में विकसित की गई हैं। कुफरी अलंकार इस किस्म में फसल 70 दिनों में तैयार हो जाती है मगर यह किस्म पछेती अंगमारी रोग के लिए कुछ हद तक प्रतिरोधी है। यह किस्म भी प्रति हेक्टेयर 200-250 क्विंटल उपज होती है। कुफरी चंद्र मुखी आलू की इस किस्म में फसल 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है और उपज 200 से 250 क्विंटल तक होती है। कुफरी नवताल जी 2524 आलू की इस किस्म में फसल 75 से 85 दिनों में तैयार हो जाती है। इसमें 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है। कुफरी बहार 3792 ई इस किस्म में फसल 90 से 110 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि गर्मियों में 100 से 135 दिनों में फसल तैयार होती है। कुफरी शील मान आलू की खेती की यह किस्म 100 से 130 दिनों में तैयार होती है, जबकि उपज 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है।
कुफरी ज्योति इस किस्म में फसल 80 से 150 दिनों में तैयार हो जाती है। यह किस्म 150 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है। कुफरी सिंदूरी इस किस्म से आलू की फसल 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है और 300 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है। कुफरी बादशाह आलू की खेती में इस किस्म में फसल 100 से 130 दिन में तैयार हो जाती है और 250-275 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है। कुफरी देवा इस किस्म में आलू की फसल 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है और 300 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है। कुफरी लालिमा इस किस्म में फसल सिर्फ 90 से 100 दिन में ही तैयार हो जाती है। यह अगेती झुलसा के लिए मध्यम अवरोधी है। कुफरी लवकर इस किस्म में 100 से 120 दिनों में फसल तैयार हो जाती है और 300 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है। कुफरी स्वर्ण इस किस्म से फसल 110 दिन में तैयार हो जाती है और उपज 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। संकर किस्में कुफरी जवाहर जेएच 222 इस किस्म में 90 से 110 दिन में फसल तैयार हो जाती है और खेतों में अगेता झुलसा और फोम रोग की यह प्रतिरोधी किस्म है। इसमें 250 से 300 क्विंटल उपज होती है। ई 4486 135 दिन में तैयार होने वाली फसल की इस किस्म में 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज तैयार होती है। यह किस्म हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात और मध्य प्रदेश के लिए अधिक उपयोगी है। आलू की नई किस्में इसके अलावा आलू की कुछ नयी किस्में भी हैं। इनमें कुफरी चिप्सोना-1, कुफरी चिप्सोना-2, कुफरी गिरिराज और कुफरी आनंद भी शामिल है।