उन्नाव स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही

Publish 27-12-2017 22:24:57


उन्नाव स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही

32 मरीजों का ऑपरेशन टॉर्च की रोशनी में कर दिया
उन्नाव,यूपी (संकल्प दीक्षित)|
नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर सोमवार को लगे नेत्र चिकित्सा शिविर में टार्च की रोशनी में आपरेशन किए जाने और रोगियों को जमीन पर लिटाने के मामले में सीएचसी प्रभारी और सीएमओ पर गाज गिर गई। शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएचसी प्रभारी देवेश दास पर निलंबन की कार्रवाई करने के साथ सीएमओ उन्नाव राजेंद्र प्रसाद को हटा दिया गया। मामले की जांच के आदेश होने पर एसडीएम मनीष बंसल, संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य अवधेश यादव और अंधता निवारण समिति के प्रभारी यूसी सिन्हा मौके पर जांच करने के लिए पहुंचे हैं। जहां दोनों अधिकारी रोगियों से बात की। साथ ही तीनों अधिकारियों ने कहा सीएचसी का ओटी आपरेशन के योग्य ही नहीं। यहां पर आपरेशन के लिए अनुमति ली ही नहीं गई।


       जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक बार फिर बड़ी लापरवाही उस वक्त देखने को मिली जब कल सोमवार को कानपुर की एक संस्था ने 36 मोतियाबिंद आंखों के मरीजों को लाकर बिना किसी सक्षम अस्पताल डॉक्टर/अस्पताल प्रशासन की अनुमति प्राप्त किये बग़ैर, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवाबगंज के ऑपरेशन थिएटर का इस्तेमाल करते हुए 32 मरीज़ों की आँख का ऑपरेशन किसी डॉक्टर न्यूटन द्वारा किया गया, इतना ही नहीं अनुमति न होने के चलते मरीजों को स्वयं के लाये हुए बिस्तर पर जमीन पर ही लिटा दिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि अस्पताल और कस्बे में कल शाम से लाइट भी नहीं थी, ऐसे में बिना लाइट के 32 मरीजों का ऑपरेशन टॉर्च की रोशनी में कर दिया गया।
ओम जगदम्बा सेवा समिति कानपुर के सदस्य छोटेलाल और बड़ेलाल के साथ ही अस्पताल में मौजूद अधिकारी भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सामुदायिक चिकित्सा केंद्र का ऑपरेशन थिएटर का घंटो इस्तेमाल होता रहा और अस्पताल में मौजूद प्रशासन को कानो कान भनक भी नहीं लगी?  मौक़े पर मरीज़ों के साथ मौज़ूद मिले ओम जगदम्बा समिति के सदस्य बड़ेलाल व छोटेलाल से बात करने पर उन्होंने बताया कि डॉक्टर न्युटन ऑपरेशन करके चले गए, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि अस्पताल से मरीज़ों को सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई? एवं अस्पताल प्रशासन किसी भी प्रकार के आँख के कैम्प की जानकारी के बारे में इनकार क्यों कर रहा है? इस सवाल पर समिति के सदस्य किसी राधेश्याम का नाम बराबर लेते रहे, अस्पताल में पहुँचने से लेकर ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्था तक के लिए केवल किसी राधेश्याम का नाम लेते रहे, लेक़िन ये राधेश्याम कौन है ये साफ़ साफ़ बताने में असमर्थ रहे।  विभागीय कार्यवाही के चलते कई लोगों पर कार्यवाही की तलवार चली पर जिन लोगों ने इस पूरे प्रकरण को अंज़ाम दिया उनका क्या ? जो बाहरी लोग पूरे प्रकरण के कर्ता हैं उन पर प्रशासन क्या कार्यवाही करेगा ? विभागीय कार्यवाही के चलते, जानकारी के अभाव के कारण विभागीय कर्मचारियों पर तो कार्यवाही की तलवार चल चुकी है पर अभी भी बड़ा सवाल यह उठता है कि पूरे प्रकरण में अस्पताल प्रशासन के अलावा जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके ऊपर शासन/प्रशासन क्या औऱ किसप्रकार की कार्यवाही करेगा ?

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