मंदिरो से चोर पीतल के आधा दर्जन घण्टा चोरी कर ले गए

Publish 10-12-2018 20:11:18


 मंदिरो से चोर पीतल के आधा दर्जन घण्टा चोरी कर ले गए


कोटद्वार। हां जी आज की ताजा खबर स्टेशन रोड़ और गोखले मार्ग पर अपनी बुलंद आवाज से विभिन्न समाचार पत्रों को बेचने वाली आवाज नहीं सुनाई देगी। समाचार पत्र वितरक मांम चंद्र त्रिपाठी की आज हृदय गति रूकने से असामयिक मृत्यु हो गई। इस मौके पर विभिन्न समाचार पत्रों के संपादकों और पत्रकारों उनके मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
समाचार पत्र वितरक मामचंद्र त्रिपाठी का 75 वर्ष की अवस्था में विगत शाम हृदयगति रूकने से असामयिक मृत्यु हो गई। उन्होंने यहां हेमवती नंदन बहुगुणा मार्ग स्थित अपने आवास में अंतिम सांस ली। इस मौके पर विभिन्न समाचार पत्रों के संपादक, पत्रकारों और समाचार पत्र वितरक संघ के पदाधिकारियों ने उनके घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। हरिद्वार चंडीघाट में शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। छोटे बेटे सोनू ने मुखाग्नि दी। मूलरूप से कुम्हार घड़ा मोहल्ला कनखल हरिद्वार निवासी मांम चंद्र का जीवन कठनाइयों से भरा रहा। पारिवारिक विवाद के चलते माम चंद्र अपनी पुस्तैनी जायदाद छोड़ यहां कोटद्वार चले आए और कोटद्वार में अपने रिश्तेदारों में भारत भूषण प्रेस में नौकरी करने लगे। कुछ समय काम करने के बाद उन्होंने प्रेस की नौकरी छोड़ दी और विभिन्न समाचार पत्रों के वितरण का काम संभाल लिया। इस दौरान भी उनके जीवन में कई उतार-चढाव आए, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। इस दौरान उनकी पहली पत्नी का देहांत हो गया पहली पत्नी से उनका एक लड़का है। बाद में उन्होंने दूसरी शादी कर ली। लेकिन उनके जीवन की परीक्षा यही खत्म नहीं हुई और बाद में दूसरी पत्नी का भी देहांत हो गया। दूसरी शादी से भी उनका एक लड़का है और जो शारीरिक रूप से विकलांग है उनके साथ ही रहता था। पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद भी उन्होंने समाचार पत्रों का वितरण काम जारी रखा और चाहे सर्दी हो, गर्मी हो या बरसात सुबह तीन बजे उठकर अखबार लेने स्टेशन पहुंच जाते। उनकी भाषा शैली इतनी प्रभावशाली थी कि जो समाचार पत्र खरीदने का इच्छुक भी नहीं होता वह भी उनकी आवाज सुनकर उनसे समाचार पत्र खरीद लेता। इसी का नतीजा है कि वे विगत 55 वर्षो से अबाध गति से विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का वितरण करते आ रहे थे।

 

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