दो अलग-अलग स्थानों पर छापे मारी कर पुलिस ने पकडी 181 बोतल अवैध शराब

Publish 14-03-2019 13:55:19


दो अलग-अलग स्थानों पर छापे मारी कर पुलिस ने पकडी 181 बोतल अवैध शराब

 

आगरा (परविंदर)| भाई बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन में भाई बहन का अटूट रिश्ता रक्षासूत्र के पवित्र धागों में बंध जाता है रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं तो भाई आजीवन अपनी बहेन की रक्षा करने का वचन देते हैं जिसमें भाई बहन का प्रेम अक्षरसः झलकता है


 भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक
रक्षाबंधन पर्व को मनाने के लिए कई दंत कथाएं प्रचलित हैं एक क्विदन्ती के अनुसार महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने जब शिशुपाल का वध चक्र सुदर्शन फेंककर किया था उस समय चक्र सुदर्शन से भगवान श्रीकृष्ण की एक उंगली कट गई जिससे खून टपकने लगा उस समय पांडवों की महारानी द्रौपदी वहां पर मौजूद थी उंगली से टपकते हुए खून को देखकर भगवान श्री कृष्ण के प्रति द्रोपदी का हृदय द्रवीभूत हो गया उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को फाड़कर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में बांध दिया बहता हुआ खून रुक गया तभी भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन मान लिया था उन्होंने द्रोपदी से कहा था कि आज से तुम हमारी बहेन हो जो कुछ तुम्हें मांगना हो मांग लो द्रोपदी ने कहा भैया इस समय मुझे कुछ नहीं चाहिए जब समय आएगा तो मांग लूंगी।
 भगवान श्री कृष्ण ने कहा ठीक है बहेना यह तुम्हारा हमारे ऊपर कर्ज है जब समय आएगा तो मुझे याद करना मैं यह सूत ब्याज के साथ चुका दूंगा एक समय की बात है पांडव द्यूत क्रीडा में अपनी महारानी द्रोपदी को हार गए दुर्योधन अपने अपमान का बदला लेने के लिए दुःशासन से कहता है कि द्रोपदी के केस पकड़कर उसे भरी सभा में उठा लाओ और निर्वस्त्र कर दो ।दुशासन द्रौपदी को निर्वस्त्र करने के लिए उसकी साड़ी को खींचना प्रारंभ कर देता है द्रोपदी ने अपनी लाज बचाने के लिए अपने भैया श्रीकृष्ण को पुकारा बहन द्रोपदी की कातरपूर्ण आवाज सुनकर  श्री कृष्ण ने वहीं से अपना दाया हाथ द्रौपदी की ओर कर दिया उसमें से रंग बिरंगी साड़ियां निकलने लगी धीरे-धीरे साड़ियों का पहाड़ लग गया दुशासन साड़ी खींचते खींचते  पसीने-पसीने हो गया परंतु वह अपने मिशन में कामयाब नहीं हो सका द्रोपदी की आबरू सुरक्षित हुई तभी से हिंदू धर्म में बड़ी श्रद्धा पूर्वक रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है ।
भविष्यत पुराण के अनुसार एक बार दैत्यो और देवताओं के मध्य होने वाले युद्ध में इंद्र भगवान असुरराज बलि से पराजित हो गए इंद्र की पत्नी सची ने भगवान विष्णु से मदद मांगी भगवान विष्णु ने सची को सूती धागे से एक वलय बना दिया इसे उन्होंने पवित्र वलय  कहा सची ने इस धागे को इंद्र की कलाई में बांध दिया और उनकी सफलता और सुरक्षा की उन्होंने कामना किया अंततः युद्ध में असुरराज बलि को उन्होंने हरा दिया और अमरावती पर अपना अधिकार कर लिया यहां से पवित्र धागे का प्रचलन हुआ इसके बाद युद्ध पर जाने से पूर्व पत्नियां अपने पतियों को यह रक्षा सूत्र बांधने लगी जो भाई-बहनों तक सीमित नहीं रह सका
भगवत पुराण के अनुसार विष्णु ने जब राजा बलि को हराकर तीनों लोकों पर अपना अधिकार कर लिया तो बलि ने विष्णु के महल में रहने की इच्छा प्रकट किया यह बात लक्ष्मी को अच्छी नहीं लगी उन्होंने बलि  के हाथ में राखी बांधकर अपने आग्रह को वापस लेने का वचन लिया बलि मान  गया तभी से या त्यौहार प्रचलित हुआ
कहा जाता है कि मेवाड़ पर जब संकट के बादल मंडराने लगे तो मेवाड़ की रक्ष के लिए महारानी कर्मवती ने  दिल्ली के शहंशाह हुमायूं के पास राखी भेजी  हुमायूं को आने में देर हुई दुश्मनों ने किले को चारों ओर से घेर लिया वे कर्मवती को जीवित पकड़ना चाहते थे कर्मवती ने अपने शरीर को जलाकर खाक कर दिया हुमायूं जब आया तो कर्मवती के खाक शरीर को देख कर बहुत रोया भस्मी को अपने मस्तक पर लगा लिया और अपने आपको धिक्कारते हूए कहने लगा कि मैं कैसा अभागा भाई हूं जो अपनी बहन की रक्षा नहीं कर सका मुझे जीवन भर इसका दुख रहेगा और मैं पश्चाताप की अग्नि में जलता रहूंगा । इस प्रकार से रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे देश में किसी न किसी रूप में लगभग सभी धर्मों के लोग मनाते हैं सगी और मुंह बोली बहने अपने भाइयों की कलाइयों में रक्षा सूत्र बांधकर भाई बहन के प्रेम को पुष्ट कर देती हैं।

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