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    21-11-2018 21:07:10

    कालागढ़/पौड़ी (कुमार दीपक)| पलाश का वृक्ष जिसे टेसू भी कहा जाता है । जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे "जंगल की आग" भी कहा जाता है।  टेशू के फूल जो तेज लाल रंग के होते है दूर से मनमोहक लगते है तेज गर्मी में टेशू के ये फूल बहुत खूबसूरत लगते है और आंखों को भी राहत पहुंचाते हैं । इन दिनों टेशू के वृक्ष टेशू के फूलों  से लदे पड़े है पूरा टेशू के लाल रंग में रंगा हुआ है जो दूर से ही बेहद खूबसूरत लगता है ।
    बताते चले कि प्राचीन काल में  होली के रंग इसके फूलो से तैयार किये जाते रहे है। पलाश यानी टेशू दो प्रकार के हो जाते है  एक तो लाल पुष्पो वाला और दूसरा सफेद पुष्पो वाला। लाल फूलो वाले पलाश का वैज्ञानिक नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा होता है। सफेद पुष्पो वाले पलाश को आयुर्वेदिक दवाइयों के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है । इनके अतिरिक्त एक पीले पुष्पों वाला पलाश भी होता है।
    पलाश को शास्त्रों में ब्रह्मा के पूजन अर्चन हेतु पवित्र माना है। पलाश के तीन पत्ते भारतीय दर्शनशास्त्र के प्रतीक है। इसके त्रिपर्नकों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास माना जाता है। पलाश का वृक्ष समस्त भारत में मैदानी इलाकों से लेकर 1200 मीटर कि ऊंचाई तक पाए जाते हैं। इसका तना प्राय: टेढ़ा मेढ़ा तथा पत्तियां 3-3 के समूह में लगी होकर कुछ मोटी व् एक तरफ से खुरदुरी व् दूसरी तरफ से कुछ चिकनी व् अधिक गहरी होती है। इसके फूल गहरे केशरिया लाल रंग के होते हैं। जिनके दलपत्र गहरे गहरे कत्थई रंग के व मोटे व मखमली होते हैं। बसंत के आगमन पर जब वे वृक्ष पतझड़ के पश्चात फूलों से लड़ते है, तब दूर से देखने पर वृक्ष समूह अग्निज्वाला कि भाँती दिखाई देते हैं, इसलिए इसे जंगल कि आग भी कहते हैं।